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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- अपन-अपन भाग

'देख दुकलहीन मैं मरहूं ना, तहां ले मोर लइका मन ल दुख झन देबे, बाढ़ जहीं तहां ले ओकर मन के बने सुग्घर घर मं बिहाव करबे, बने पुतरी असन बहू लाबे अउ मोर ओ बेटी मन ल बने खाता-पीता घर मं देबे, नंगरा के हाथ झन धरा देबे नइ ते बिन मारे के मारे मर जाही बपूरी मन.

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