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छत्तीसगढ़ी म पढ़व- व्यंग्य लरहा होय के मरहा नाव म का धरे हे?

लरहा होय चाहे मरहा. नाव के खूंटा म सबे मनखे बंधाय रहिथें. फेर नोंनी होय चाहे बाबू कोनो नाव धराय बिन नइ राहें. कतको झन मया के माया म उटपुटांग-उटपुटांग नाव धर देथें. दिनमान जनम होइस त दीनू, संझा नोंनी होइस त संध्या, अब लरहा नाव ल देखव लार जादा बोहावत हे त ओखर नाव होगे लरहा. जनम होते साठ अति दुबर पातर देंह वाले लइका के नाव मरहा रखागे. नोंनी होइस त लरही/ मरही आदि.

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