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छ्त्तीसगढ़ी व्यंग्य - लेखकजी के सांप-सीढ़िया सोच

एक दिन एक झन लेखक महाशय के फोन अइस- ‘मोर हाल-चाल पूछिस’.सुख दुःख के सरलग गोठ के बाद मोला किहिस ‘आजकल मेंहा बढ़िया लेख लिखत हंव. लेख अतेक बढिया हे के मोला सोचे बर परत हे के एला कते अखबार/पत्रिका म छपे बर भेजंव. भेजंव के नइ भेजंव. आज के समय म विचार अउ भाव के चोरी-चकारी बाढ़गे हे.

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