कोरोनाकाल में ऑक्सीजन के मौजूदा संकट ने हमें व्यावहारिक तौर पर यह समझा दिया है कि पेड़ कितने कीमती हैं. इसके बाद होना तो यही चाहिए कि अपने पर्यावरण को सबसे प्राथमिकता में रखा जाए, लेकिन विकास परियोजनाओं में पेड़ों की अंधाधुंध बलि चढ़ाई जाती रही है. ताजा मामला मध्यप्रदेश ...

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